Lord Krishna Wallpapers in hd | श्री कृष्ण की मनमोहक तस्वीरे

Lord Krishna सनातन धर्म में भगवान विष्णु के आठवे अवतार माने जाते है| भगवान श्रीकृष्ण हिन्दू धर्म के एक लोकप्रिय देवता है जो दया, कोमलता और प्रेम के देवता है|

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ था| महर्षी वेद व्यास जो श्रीकृष्ण के समकालीन थे उनकी रचित श्रीमद्भागवत और महाभारत में श्रीकृष्ण के चरित्र का विस्तृत वर्णन किया गया है| भगवान श्रीकृष्ण के देहांत के साथ द्वापर युग समाप्त हो गया| 

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लगभग 180 ईसा पूर्व में इंडो-ग्रीक राजा ‘अगाथोकल्स’ ने देवताओं के चित्र धारण करने वाले कुछ सिक्के जारी किए थे| इन सिक्को पर गदा, हल और भगवान श्रीकृष्ण, शंख और सुदर्शन चक्र दर्शाये हुए है| 

कई पुरानो में कृष्ण के जीवन कथा को बताया गया है| महाकाव्य महाभारत मे भगवान श्रीकृष्ण के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है| भागवत पुराण और विष्णु पुराण इत्यादी में भी कृष्ण कहानिया दी गयी है पर यह कहानिया एक दुसरे से थोडीसी भिन्न है| 

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ‘मथुरा’ के कारागार में भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष में अष्टिमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के दिन रात्रि के 12 बजे हुआ था| कृष्ण का जन्म दिन जन्माष्टमी के नाम से भारत, नेपाल, अमेरिका सहित विश्व के बहुत सारे देशो में आनंद से मनाया जाता है| 

१२४ वर्ष के जीवन काल के बाद श्रीकृष्ण ने अपना मानव अवतार त्याग दिया| भागवत पुराण के अध्याय ३१ में कहा गया है की भगवान श्रीकृष्ण अपने देहांत के बाद, योगिक एकाग्रता की वजह से सीधे वैकुंठ (स्वर्ग) में लौटे| 

दक्षिण भारत में कृष्ण जन्माष्टमी व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल के राज्यों में कई प्रमुख कृष्ण मंदिर हैं|

कृष्ण की प्रतिमाओं को थाईलैंड में भी पाया गया है| वियतनाम और कंबोडिया की मध्यकालीन युग में कृष्ण कला की विशेषता है|

भगवान श्रीकृष्ण का चित्रण आमतौर पर विष्णु जैसे कृष्ण, काले या नीले रंग की त्वचा के साथ किया जाता है| कृष्ण को अक्सर मोर-पंख वाले मुकुट और भारतीय बांसुरी बजाते हुए दिखाया जाता है। कृष्ण को आमतौर पर त्रिभन्ग मुद्रा में पर एक पैर को दुसरे पैर में डाले रूप में चित्रित किया जाता है| कृष्ण को अक्सर बालक के रूप में भी दिखाया जाता है|

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Shivaji Maharaj HD Wallpapers और उनके परिवार के बारे में पूरी जानकारी 2020 तक

पूरे हिंदुस्तान और महाराष्ट्र के आराध्य दैवत, हिन्दुओ के प्रेरणा स्थान श्री छत्रपति Shivaji Maharaj का जनम 19 फ़रवरी 1630 को शिवनेरी किले पर हुआ| उनके पिताजी का नाम श्री छत्रपति शाहजी महाराज और माताजी का नाम राजमाता जिजाऊ था| 

अपने पराक्रम से श्री छत्रपति Shivaji Maharaj ने मराठो के साम्राज्य की नीव रखी| जिसकी बदौलत मराठोने भीम पराक्रम दिखाकर मुघलो को मात देकर लगभग पुरे हिंदुस्तान को जीत लिया था| 

श्री छत्रपति Shivaji Maharaj के परिवार के बारे में जानकारी 

श्री छत्रपति Shivaji Maharaj के आठ विवाह हुए थे| उनके पत्नियो के नाम 

  1. सईबाई निम्बालकर
  2. सोयराबाई मोहिते 
  3. पुतलाबाई पालकर 
  4. लक्ष्मीबाई विचारे 
  5. गूनवंताबाई इंगले 
  6. काशीबाई जाधव
  7. सगुनाबाई शिंदे 
  8. सकवाराबाई गायकवाड 

श्री छत्रपति Shivaji Maharaj को दो बेटे और छह बेटियां थी|

बेटों के नाम

  1. छत्रपति संभाजी महाराज   (माता सईबाई निम्बालकर)
  2. छत्रपति राजाराम महाराज  (माता सोयराबाई मोहिते)

बेटियों के नाम 

  1. अम्बिकाबाई महाडिक  (माता सईबाई निम्बालकर)
  2. रानुबाई पाटकर  (माता सईबाई निम्बालकर)
  3. सखुबाई निम्बालकर  (माता सईबाई निम्बालकर)
  4. दीपाबाई  (माता सोयराबाई)
  5. राजकुंवरबाई  (माता सगूनाबाई)
  6. कमलाबाई   (माता सकवारबाई)

श्री छत्रपति Shivaji Maharaj के बेटों का परिवार 

छत्रपति संभाजी महाराज के पत्नी का नाम येसूबाई था| इनको एक बेटा और तीन बेटिया थी| उनके नाम शाहुमहाराज (बेटा), भवानिबाई (बेटी), बाईसाहेब (बेटी) और अहिल्याबाई (बेटी)|

छत्रपति संभाजी महाराज के बाद उनके बेटे शाहुमहाराज ने सातारा के गद्दी को संभाला| 

सातारा के शाहुमहाराज के दत्तक पुत्र थे रामराजा|

और प्रतापसिंह के बेटे है आजके सातारा के उदयन राजे भोसले (2020)|

छत्रपति राजाराम महाराज की चार पत्निया थी|

  1. जानकीबाई गुजर 
  2. ताराबाई मोहिते 
  3. राजसबाई कगलकर घाटगे 
  4. अम्बिकाबाई 

छत्रपति राजाराम महाराज के दो बेटे थे| स्वयम छत्रपति राजाराम महाराज कोल्हापुर के राजा थे| उनके बाद उनके बेटो ने कोल्हापुर के गद्दी को संभाला|

  1. शिवाजी राजे  (माता ताराबाई)
  2. संभाजी राजे  (माता राजसबाई)

संभाजी राजे के पुत्र का नाम था शिवाजी राजे (तीसरे)|

 शाहू राजे के दो पुत्र है संभाजी राजे (साल 2020) और मालोजी राजे|

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इन्हें भी पढ़िए |

Durga Mata Ji images | दुर्गा माताजी की नयी अलौकिक तस्वीरे

Durga Mata को हिन्दू धर्म में दानव और दुष्टोंका संहार करने वाली माना जाता है| दानव और दुष्टोंका संहार करके दुर्गा माता लोंगो के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है| इसलिए हिन्दू धर्म में Durga Mata का महत्वपूर्ण स्थान है|

Durga Mata Ji images

माता दुर्गा के दर्शन मात्र से ही जीवन में मौजूद परेशानिया, कष्ट, संकट दूर हो जाते है और मानव जीवन सुखी और समृद्ध जो जाता है| आप भी Durga Mata की इन अलौकिक तस्वीरोंका दर्शन कीजिये और धन्य हो जाये|

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महिषासुर दानव का वध करने के लिए विश्व के निर्माता ब्रह्माजी ने दुर्गा माता को बनाया था| दशहरे के दिन माता दुर्गा ने  महिषासुर दानव का वध किया था| 

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हिन्दू धर्म में दुर्गा माता को नारी शक्ति का एक रूप माना जाता है| नारी को दुर्गा की उपमा देकर सन्मानित किया जाता है|

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दुर्गा माता की सवारी शेर है|

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हिंदुस्तान में प्रमुख रूप से बंगाल में दुर्गोस्तव धूम-धाम से मनाया जाता है|

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Hanuman Chalisa in Bengali | বাংলা ভাষায় হনুমান চালিশা

Hanuman Chalisa : হনুমান চালিশা হলেন হিন্দু ভক্তিমূলক স্তোত্র (স্টোত্র) যা ভগবান হনুমানকে সম্বোধন করেছিলেন। এটি ষোড়শ শতাব্দীতে সাধু তুলসীদাস লিখেছেন। শুরুতে ও শেষে দোহাস বাদে হনুমান চালিশার চল্লিশটি আয়াত রয়েছে। Hanuman Chalisa.

Hanuman Chalisa in Bengali | হনুমান চালিশা

  • প্রথম দশটি চৌপাই বর্ণিত হয়েছে, শুভ রূপ, জ্ঞান, গুণ, শক্তি এবং হনুমানের সাহসী।
  • লক্ষ্মণকে চেতনাতে ফিরিয়ে আনতে হনুমানের ভূমিকা বর্ণনা করে একাদশ থেকে পনেরো চৌপাশ।
  • প্রভু শ্রী রামের সেবায় হনুমানের কাজকে এগারো থেকে বিশ জন চৌপাই বর্ণনা করেছেন।  
  • একবিংশ চৌপাই থেকে তুলসীদাস হনুমানের কৃপা প্রয়োজনের বর্ণনা দিয়েছেন। শেষ পর্যন্ত, संत তুলসীদাস ভগবান হনুমানকে শুভেচ্ছা জানিয়েছেন এবং তাঁর অন্তরে স্থির থাকার জন্য অনুরোধ করেছেন।  

প্রথম দোহায় শ্রী শব্দের মধ্য দিয়ে শুরু হয়েছিল, যা হনুমানের গুরু হিসাবে বিবেচিত মা সীতা বোঝায়।  

পরিচায়ক দোহা

শ্রী গুরু চরণ সরোজ রজ নিজমন মুকুর সুধারি |                                                           বরণৌ রঘুবর বিমলযশ জো দাযক ফলচারি ||

বুদ্ধিহীন তনুজানিকৈ সুমিরৌ পবন কুমার |                                                                      বল বুদ্ধি বিদ্যা দেহু মোহি হরহু কলেশ বিকার্ ||

চৌপাঈ

জয হনুমান জ্ঞান গুণ সাগর |                                                                                    জয কপীশ তিহু লোক উজাগর || 1 ||

রামদূত অতুলিত বলধামা |                                                                                    অংজনি পুত্র পবনসুত নামা || 2 ||

মহাবীর বিক্রম বজরংগী |                                                                                      কুমতি নিবার সুমতি কে সংগী ||3 || 

কংচন বরণ বিরাজ সুবেশা |                                                                                      কানন কুংডল কুংচিত কেশা || 4 ||

হাথবজ্র ঔ ধ্বজা বিরাজৈ |                                                                                      কাংথে মূংজ জনেবূ সাজৈ || 5||

শংকর সুবন কেসরী নংদন |                                                                                      তেজ প্রতাপ মহাজগ বংদন || 6 ||

বিদ্যাবান গুণী অতি চাতুর |                                                                                        রাম কাজ করিবে কো আতুর || 7 ||

প্রভু চরিত্র সুনিবে কো রসিযা |                                                                                      রামলখন সীতা মন বসিযা || 8||

সূক্ষ্ম রূপধরি সিযহি দিখাবা |                                                                                    বিকট রূপধরি লংক জরাবা || 9 ||

ভীম রূপধরি অসুর সংহারে |                                                                                  রামচংদ্র কে কাজ সংবারে || 10 ||

লায সংজীবন লখন জিযাযে |                                                                                      শ্রী রঘুবীর হরষি উরলাযে || 11 ||

রঘুপতি কীন্হী বহুত বডাযী |                                                                                      তুম মম প্রিয ভরতহি সম ভাযী || 12 ||

সহস বদন তুম্হরো যশগাবৈ |                                                                                    অস কহি শ্রীপতি কংঠ লগাবৈ || 13 ||

সনকাদিক ব্রহ্মাদি মুনীশা |                                                                                      নারদ শারদ সহিত অহীশা || 14 || 

যম কুবের দিগপাল জহাং তে |                                                                                  কবি কোবিদ কহি সকে কহাং তে || 15 ||

তুম উপকার সুগ্রীবহি কীন্হা |                                                                                    রাম মিলায রাজপদ দীন্হা || 16 ||

তুম্হরো মংত্র বিভীষণ মানা |                                                                                  লংকেশ্বর ভযে সব জগ জানা || 17 ||

যুগ সহস্র যোজন পর ভানূ |                                                                                        লীল্যো তাহি মধুর ফল জানূ || 18 || 

প্রভু মুদ্রিকা মেলি মুখ মাহী |                                                                                    জলধি লাংঘি গযে অচরজ নাহী || 19 ||

দুর্গম কাজ জগত কে জেতে |                                                                                  সুগম অনুগ্রহ তুম্হরে তেতে || 20 ||

রাম দুআরে তুম রখবারে |                                                                                        হোত ন আজ্ঞা বিনু পৈসারে || 21 ||

সব সুখ লহৈ তুম্হারী শরণা |                                                                                          তুম রক্ষক কাহূ কো ডর না || 22 ||

আপন তেজ তুম্হারো আপৈ |                                                                                  তীনোং লোক হাংক তে কাংপৈ || 23 ||

ভূত পিশাচ নিকট নহি আবৈ |                                                                                  মহবীর জব নাম সুনাবৈ || 24 ||

নাসৈ রোগ হরৈ সব পীরা |                                                                                      জপত নিরংতর হনুমত বীরা || 25 ||

সংকট সেং হনুমান ছুডাবৈ |                                                                                      মন ক্রম বচন ধ্যান জো লাবৈ || 26 ||

সব পর রাম তপস্বী রাজা |                                                                                    তিনকে কাজ সকল তুম সাজা || 27 ||

ঔর মনোরধ জো কোযি লাবৈ |                                                                                  তাসু অমিত জীবন ফল পাবৈ || 28 ||

চারো যুগ পরিতাপ তুম্হারা |                                                                                        হৈ পরসিদ্ধ জগত উজিযারা || 29 ||

সাধু সংত কে তুম রখবারে |                                                                                    অসুর নিকংদন রাম দুলারে || 30 ||

অষ্ঠসিদ্ধি নব নিধি কে দাতা |                                                                                      অস বর দীন্হ জানকী মাতা || 31 ||

রাম রসাযন তুম্হারে পাসা |                                                                                      সাদ রহো রঘুপতি কে দাসা || 32 ||

তুম্হরে ভজন রামকো পাবৈ |                                                                                    জন্ম জন্ম কে দুখ বিসরাবৈ || 33 ||

অংত কাল রঘুবর পুরজাযী |                                                                                          জহাং জন্ম হরিভক্ত কহাযী || 34 ||

ঔর দেবতা চিত্ত ন ধরযী |                                                                                      হনুমত সেযি সর্ব সুখ করযী || 35 ||

সংকট কটৈ মিটৈ সব পীরা |                                                                                      জো সুমিরৈ হনুমত বল বীরা || 36 ||

জৈ জৈ জৈ হনুমান গোসাযী |                                                                                      কৃপা করো গুরুদেব কী নাযী || 37 ||

জো শত বার পাঠ কর কোযী |                                                                                    ছূটহি বংদি মহা সুখ হোযী || 38 ||

জো যহ পডৈ হনুমান চালীসা |                                                                                  হোয সিদ্ধি সাখী গৌরীশা || 39 ||

তুলসীদাস সদা হরি চেরা |                                                                                      কীজৈ নাথ হৃদয মহ ডেরা || 40 ||

শেষ হওয়া দোহা রাম, লক্ষ্মণ এবং সীতার সাথে হনুমানকে হৃদয়ে থাকতে অনুরোধ করলেন।  

দোহার সমাপ্তি

পবন তনয সংকট হরণ – মংগল মূরতি রূপ্ |                                                                  রাম লখন সীতা সহিত – হৃদয বসহু সুরভূপ্ ||

জয় ঘোষ

সিযাবর রামচংদ্রকী জয | পবনসুত হনুমানকী জয | বোলো ভাযী সব সংতনকী জয |

Shiv Chalisa in Hindi | चमत्कारी श्री शीव चालीसा

Shiv Chalisa यह हिंदू देवता, भगवान शिव को समर्पित एक भक्ति भजन (स्तोत्र) हैl शिव पुराण के अनुसार, इसमें 40 (चालिस) चौपाइयां (छंद) शामिल हैंl Shiv Chalisa का प्रतिदिन या विशेष उत्सवोंमें, जैसे महा शिवरात्रि के दिन शिव के उपासक और शीव भक्त पठन करते हैl 

Shiv Chalisa in Hindi

केवल भगवान शंकर ही ऐसे देव है जो मानव और दानव दोनों के इष्ट देव है| भगवन शीव के स्तुती में श्री Shiv Chalisa सबसे श्रेष्ट मानी गयी है और कल्याणकारी भी| 

भगवान शीव किसी एक जाती और धर्म के नहीं है बल्कि पुरे मानव समाज के है वैसे ही Shiv Chalisa और शिवभक्ति का अधिकार पुरे मानव समाज को है| 

सिर्फ बेल पत्र और जल समर्पित करने से प्रसन्न होने वाले भोले शंकर Shiv Chalisa का पाठ करने से अतिप्रसन्न हो जाते है और भक्तो की हर एक मनोकामना पुरी कर देते है|

Shiv Chalisa का प्रतिदिन पाठ करनेसे और सुननेसे घर में सुख, शांति, धन, वैभव, भक्ति और प्रेम के वृद्धि होती है|

इस Shiv Chalisa का आप स्वयं भी पाठ कीजिये और दुसरो को भी सुनाइए, इससे अपार पूण्य की प्राप्ति होती है|

ॐ नम: शिवाय 

ll  प्रारंभिक दोहा ll

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान l                                                                          कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ll

ll चौपाई ll

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाल ll 1 ll                                                      भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के ll 2 ll                                                          अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए ll 3 ll                                                            वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे ll 4 ll

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी ll 5 ll                                                          कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी ll 6 ll                                                        नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे ll 7 ll                                                            कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ ll 8 ll

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा  ll 9 ll                                                        किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी  ll 10 ll                                                    तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ll 11 ll                                                      आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा ll 12 ll

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई  ll 13 ll                                                      किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ll 14 ll                                                          दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं ll 15 ll                                                    वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ll 16 ll

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला ll 17 ll                                                      कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई ll 18 ll                                                          पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा ll 19 ll                                                      सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ll 20 ll

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई ll 21 ll                                                      कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ll 22 ll                                                    जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी ll 23 ll                                                  दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ll 24 ll

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो ll 25 ll                                                     लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो ll 26 ll                                                          मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई ll 27 ll                                                          स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी ll 28 ll

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं ll 29 ll                                                      अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ll 30 ll                                                  शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन ll 31 ll                                                        योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं ll 32 ll

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ll 33 ll                                                        जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई ll 34 ll                                                        ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी ll 35 ll                                                      पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ll 36 ll

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ll 37 ll                                                            त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा ll 38 ll                                                          धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ll 39 ll                                                              जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे ll 40 ll

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

ll समापन दोहा ll

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा l तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ll                          मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान l अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ll

Hanuman Chalisa in Telugu

Hanuman Chalisa: హనుమంతుడు చలిసా హనుమంతుడిని ఉద్దేశించి హిందూ భక్తి శ్లోకం (స్తోత్రం). దీనిని 16 వ శతాబ్దంలో సెయింట్ తులసీదాస్ రాశారు. హనుమాన్ చలిసా (Hanuman Chalisa) ప్రారంభంలో మరియు చివరిలో దోహాలను మినహాయించి 40 శ్లోకాలు ఉన్నాయి.

Hanuman Chalisa in Telugu

  • మొదటి పది చౌపాయిలు వర్ణించబడ్డాయి, శుభ రూపం, జ్ఞానం, ధర్మాలు, శక్తులు మరియు హనుమంతుడి ధైర్యం.
  • పదకొండవ నుండి పదిహేనవ చౌపైస్, లక్ష్మణుడిని స్పృహలోకి తీసుకురావడంలో హనుమంతుడి పాత్రను వివరిస్తాడు.  
  • పదకొండు నుండి ఇరవై చౌపాయిస్ ప్రభు శ్రీ రామ్కు చేసిన సేవలో హనుమంతుడి చర్యను వివరిస్తారు.  
  • ఇరవై మొదటి చౌపాయ్ నుండి, తులసీదాస్ హనుమంతుడి కృపా యొక్క అవసరాన్ని వివరించాడు. చివరికి, సెయింట్ తులసీదాస్ హనుమంతుడిని పలకరించి, తన హృదయంలో నివసించమని అభ్యర్థిస్తాడు.

మొదటి పరిచయ దోహా ష్రు అనే పదంతో ప్రారంభమవుతుంది, ఇది హనుమంతుని గురువుగా భావించే మాతా సీతను సూచిస్తుంది.  

పరిచయ దోహా  

శ్రీ గురు చరణ సరోజ రజ నిజమన ముకుర సుధారి l
వరణౌ రఘువర విమల యశ జో దాయక ఫలచారి ll

బుద్ధిహీన తనుజానికై సుమిరౌ పవన కుమార l
బల బుద్ధి విద్యా దేహు మోహి హరహు కలేశ వికార్ ll

చౌపాయీ

జయ హనుమాన జ్ఞానగుణసాగర
జయ కపీశ తిహుం లోక ఉజాగర ll 1 ll

రామదూత అతులితబలధామా
అంజనిపుత్ర పవనసుతనామా ll 2 ll

మహావీర విక్రమ బజరంగీ 
కుమతి నివార సుమతి కే సంగీ ll 3 ll

కంచనవరన విరాజ సువేసా 
కానన కుండల కుంచిత కేశా ll 4 ll

హాథ వజ్ర అరు ధ్వజా విరాజై 
కాంధే మూంజ జనేవూ సాజై ll 5 ll

శంకరసువన కేసరీనందన 
తేజ ప్రతాప మహాజగవందన ll 6 ll

విద్యావాన గుణీ అతిచాతుర 
రామ కాజ కరివే కో ఆతుర ll 7 ll

ప్రభు చరిత్ర సునివే కో రసియా 
రామ లఖన సీతా మన బసియా ll 8 ll

సూక్ష్మ రూప ధరి సియహిం దిఖావా 
వికట రూప ధరి లంక జరావా ll 9 ll

భీమ రూప ధరి అసుర సంహారే 
రామచంద్ర కే కాజ సంవారే ll 10 ll

లాయ సంజీవన లఖన జియాయే 
శ్రీరఘువీర హరషి ఉర లాయే ll 11 ll

రఘుపతి కీన్హీ బహుత బడాయీ 
కహా భరత సమ తుమ ప్రియ భాయీ ll 12 ll

సహస వదన తుమ్హరో యస గావైం 
అస కహి శ్రీపతి కంఠ లగావై ll 13 ll

సనకాదిక బ్రహ్మాది మునీశా 
నారద శారద సహిత అహీశా ll 14 ll

యమ కుబేర దిగపాల జహాం తే 
కవి కోవిద కహి సకే కహాం తే ll 15 ll

తుమ ఉపకార సుగ్రీవహిం కీన్హా 
రామ మిలాయ రాజపద దీన్హా ll 16 ll

తుమ్హరో మంత్ర విభీషన మానా 
లంకేశ్వర భయే సబ జగ జానా ll 17 ll

యుగ సహస్ర యోజన పర భానూ 
లీల్యో తాహి మధుర ఫల జానూ ll 18 ll

ప్రభు ముద్రికా మేలి ముఖమాహీ 
జలధి లాంఘి గయే అచరజ నాహీం ll 19 ll

దుర్గమ కాజ జగత కే జేతే 
సుగమ అనుగ్రహ తుమ్హరే తేతే ll 20 ll

రామ ద్వారే తుమ రఖవారే 
హోత న ఆజ్ఞా బిను పైసారే ll 21 ll

సబ సుఖ లహై తుమ్హారీ శరణా 
తుమ రక్షక కాహూ కో డరనా ll 22 ll

ఆపన తేజ సంహారో ఆపై 
తీనోం లోక హాంక తేం కాంపై ll 23 ll

భూత పిశాచ నికట నహిం ఆవై 
మహావీర జబ నామ సునావై ll 24 ll

నాసై రోగ హరై సబ పీరా 
జపత నిరంతర హనుమత వీరా ll 25 ll

సంకటసే హనుమాన ఛుడావై
మన క్రమ వచన ధ్యాన జో లావై ll 26 ll

సబ పర రామ తపస్వీ రాజా 
తిన కే కాజ సకల తుమ సాజా ll 27 ll

ఔర మనోరథ జో కోయీ లావై 
సోయీ అమిత జీవన ఫల పావై ll 28 ll

చారోం యుగ పరతాప తుమ్హారా 
హై పరసిద్ధ జగత ఉజియారా ll 29 ll

సాధు సంత కే తుమ రఖవారే 
అసుర నికందన రామ దులారే ll 30 ll

అష్ట సిద్ధి నవ నిధి కే దాతా 
అస వర దీన జానకీ మాతా ll 31 ll

రామ రసాయన తుమ్హరే పాసా 
సదా రహో రఘుపతి కే దాసా ll 32 ll

తుమ్హరే భజన రామ కో పావై 
జనమ జనమ కే దుఖ బిసరావై ll 33 ll

అంత కాల రఘుపతి పుర జాయీ 
జహాం జన్మ హరిభక్త కహాయీ ll 34 ll

ఔర దేవతా చిత్త న ధరయీ 
హనుమత సేయి సర్వ సుఖ కరయీ ll 35 ll

సంకట హరై మిటై సబ పీరా – 
జో సుమిరై హనుమత బలబీరా ll 36 ll

జై జై జై హనుమాన గోసాయీ 
కృపా కరహు గురు దేవ కీ నాయీ ll 37 ll

జో శత బార పాఠ కర కోయీ 
ఛూటహి బంది మహా సుఖ హోయీ ll 38 ll

జో యహ పఢై హనుమాన చలీసా 
హోయ సిద్ధి సాఖీ గౌరీసా ll 39 ll

తులసీదాస సదా హరి చేరా 
కీజై నాథ హృదయ మహ డేరా ll 40 ll

దోహాను ముగించారు

పవనతనయ సంకట హరణ మంగల మూరతి రూప్
రామ లఖన సీతా సహిత హృదయ బసహు సుర భూప్ |

జై ఘోష్  

బోల్ బజరంగబలి కి విక్టరీ l
పవన్ పుత్ర హనుమాన్ కి విక్టరీ ll

Hanuman Chalisa in English

Hanuman Chalisa is a Hindu devotional hymn (stotra) addressed to Lord Hanuman. It is written by saint Tulsidas in the 16th century. Hanuman Chalisa has 40 verses excluding the dohas at the beginning and at the end.

Hanuman Chalisa in English

  • The first ten Chaupais are described, auspicious form, knowledge, virtues, powers, and bravery of Hanuman.
  • Eleventh to fifteenth Chaupais describing the role of Hanuman in bringing back Lakshman to consciousness.
  • Eleven to twenty Chaupais describe the act of Hanuman in his service to Prabhu Shri Ram.
  • From the twenty-first Chaupai, Tulsidas describes the need for Hanuman’s Kripa. In the end, Saint Tulsidas greets Lord Hanuman and requests him to reside in his heart. 

The first introductory Doha begins with the word shrī, which refers to Mata Sita, who is considered the Guru of Hanuman.

Introductory Doha

Shri guru charana saroj raj, neej manu mukuru sudhari l
Baranau raghubara bimala jasu, jo dayaku phal chari ll

Buddhiheena tanu janike, sumero pavan kumar l
Bal budhi vidya dehu mohi harahu kalesa vikara ll

Chaupai 

Jai Hanuman gyana gun sagar l
Jai Kapis tihun lok ujagar ll 1 ll

Ram doot atulit bal dhama l
Anjaani-putra Pavan sut nama ll 2 ll

Mahavir vikram Bajrangi l
Kumati nivar sumati ke sangi ll 3 ll

Kanchan baran biraj subesa l
Kanan Kundal Kunchit Kesa ll 4 ll

Hath bajra au dhvaja birajai l
Kaandhe moonja janehu sajai ll 5 ll

Shankar suvan kesri nandan l
Tej prataap maha jag bandana ll 6 ll

Vidyavaan guni ati chatur l
Ram kaj karibe ko aatur ll 7 ll

Prabhu charitra sunibe ko rasiya l
Ram Lakhan Sita mana Basiya ll 8 ll

Sukshma roop dhari siyahi dikhava l
Bikat roop dhari lanka jarava ll 9 ll

Bhima roop dhari asura sanghare l
Ramachandra ke kaj sanvare ll 10 ll

Laye Sanjivani Lakhan Jiyaye l
Shri Raghubir harashi ura laye ll 11 ll

Raghupati kinhi bahut badhai l
Tum mama priya Bharat-hi-sam bhai ll 12 ll

Sahas badan tumharo jas gaave l
Asa-kahi shripati kanth lagaave ll 13 ll

Sankadhik Brahmaadi Munisa l
Narad-Sarad sahit ahisa ll 14 ll

jama Kuber Dikpaal Jahan te l
Kabi kovid kahi sake kahan te ll 15 ll

Tum upkar Sugreevahin kinha l
Ram milaye rajpad dinha ll 16 ll

Tumharo mantra Vibheeshan maana l
Lankeshwar bhaye sab jag jana ll 17 ll

Yug sahastra jojan par bhanu l
Leelyo tahi madhur phala janu ll 18 ll

Prabhu mudrika meli mukh mahee l
Jaladhi langhi gaye achraj nahee ll 19 ll

Durgaam kaj jagath ke jete l
Sugam anugraha tumhre tete ll 20 ll

Ram duwaare tum rakhvare l
Hoat na agya binu paisare ll 21 ll

Sub sukh lahae tumhari sarna l
Tum rakshak kahu ko darnaa ll 22 ll

Aapan tej samharo aapai l
Teenhon lok hank te kanpai ll 23 ll

Bhoot pisaach nikat nahin aavai l
Mahabir jab naam sunavae ll 24 ll

Nase rog hare sab peera l
Japat nirantar Hanumant beera ll 25 ll

Sankat te Hanuman chhudave l
Man Karam Vachan dyan jo lavai ll 26 ll

Sab par Ram tapasvee raja l
Tina ke kaj sakal Tum saja ll 27 ll

Aur manorath jo koi lave l
Sohi amit jeevan phal pave ll 28 ll

Charon jug partap tumhara l
Hai parasiddh jagat ujiyara ll 29 ll

Sadhu sant ke tum rakhware l
Asur nikandan Ram dulhare ll 30 ll

Ashta-sidhi nav nidhi ke daata l
Asa-bar deen Janki mata ll 31 ll

Ram rasayan tumhare pasa l
Sada raho Raghupati ke dasa ll 32 ll

Tumhare bhajan Ram ko pave l
Janam-janam ke dukh bisraave ll 33 ll

Anth-kaal Raghubir pur jaee l
Jahan janam Hari-Bhakta Kahai ll 34 ll

Aur devta chitta na dharaee l
Hanumanth se hi sarba sukh karaee ll 35 ll

Sankat kate-mite sab peera l
Jo sumire Hanumata balbeera ll 36 ll

Jai Jai Jai Hanuman gosaee l
Kripa karahu gurudev ki naee ll 37 ll

Jo shath baar paath kara koi l
Chhutahi bandhi maha sukh hoee ll 38 ll

Jo yaha padhe Hanuman Chalisa l
Hoye siddhi saakhi Gaureesa ll 39 ll

Tulsidas sada hari chera l
Keejai nath hridaye maha dera ll 40 ll

The concluding Doha requests Hanuman to reside in the heart, along with Ram, Lakshman and Sita.

Concluding Doha

Pavan tanay sankat harana mangal murti roop ।
Ram Lakhan Sita sahit hriday basau soor bhoop ॥

Jai Ghosh

Bol Bajarangabali ki jai ।
Pavan putra Hanuman ki jai ॥

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Hanuman Chalisa in pdf | अद्भुत श्री हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa एक हिंदू भक्ति भजन (स्तोत्र) है जो भगवान हनुमान को संबोधित है। यह 16 वीं शताब्दी में संत तुलसीदास द्वारा लिखा गया है। Hanuman Chalisa में शुरुआत और अंत में दोहा को छोड़कर 40 छंद हैं।   

Hanuman Chalisa in Hindi

  • पहले दस चौपाइयों का वर्णन, शुभ स्वरूप, ज्ञान, गुण, शक्तियां, और हनुमानजी की वीरता के साथ किया गया है।
  • ग्यारहवीं से पंद्रहवीं चौपाई में लक्ष्मण को होश में लाने में हनुमानजी की भूमिका का वर्णन किया गया है।
  • ग्यारह से बीस चौपाइयों में प्रभु श्री राम के लिए उनकी सेवा में हनुमानजी के कार्य का वर्णन है।
  • इक्कीस चौपाई से, तुलसीदास ने हनुमानजी के कृपा की आवश्यकता का वर्णन किया है। अंत में, संत तुलसीदास भगवान हनुमान का अभिवादन करते हैं और उनसे अपने हृदय में निवास करने का अनुरोध करते हैं।  

प्रथम परिचयात्मक दोहा शब्द श्री से शुरू होता है, जो माता सीता को संदर्भित करता है, जिन्हें हनुमान का गुरु माना जाता है।  

परिचयात्मक दोहा      

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवनकुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेस विकार॥

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ १ ॥

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ २ ॥

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥ ३ ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ४ ॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ ५ ॥

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥ ६ ॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥ ७ ॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥ ८ ॥

सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ ९ ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचन्द्र के काज सँवारे॥ १० ॥

लाय सँजीवनि लखन जियाए।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ ११ ॥

रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ १२ ॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ १३ ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥ १४ ॥

जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते।
कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥ १५ ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥ १६ ॥

तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ १७ ॥

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ १८ ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ १९ ॥

दुर्गम काज जगत के जेते । 
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ २० ॥

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ २१ ॥

सब सुख लहै तुम्हारी शरना।
तुम रक्षक काहू को डरना॥ २२ ॥

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनौं लोक हाँक ते काँपे॥ २३ ॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥ २४ ॥

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ २५ ॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ २६ ॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोहि अमित जीवन फल पावै॥ २८ ॥

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥ २९ ॥

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥ ३० ॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन्ह जानकी माता॥ ३१ ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥ ३२ ॥

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥ ३३ ॥

अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥ ३४ ॥

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ ३५ ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ ३६ ॥

जय जय जय हनुमान गुसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ ३७ ॥

जो शत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥

जो यह पढे हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ ३९ ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ४० ॥

समापन दोहा हनुमान (Hanuman) से राम, लक्ष्मण और सीता के साथ हृदय में निवास करने का अनुरोध करता है।

दोहा का समापन

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥

जय घोष

बोल बजरंगबली की जय l
पवनपुत्र हनुमान की जय ll   

Hanuman ji images HD | हनुमानजी की अद्भुत तस्वीरे

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हनुमान जी कलयुग के सबसे प्रभावशाली देव माने जाते है| उनके दर्शन मात्र से ही सारे दुःख, पीड़ा, भय दूर हो जाते है| Hanuman ji की सिर्फ प्रतिमा (images) देखने से ही मन प्रसन्न हो जाता है| ऐसी ही कुछ विश्व प्रसिद्ध Hanuman Ji की HD images यहापर दी गयी है जिन्हें आप download भी कर सकते है| 

   

 

 

 

 

 

 

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अंजनेरी हनुमानजी का जन्म स्थान है, और इसका नाम हनुमानजी की माताजी अंजना माता के नाम पर रखा गया है| महाराष्ट्रा के नासिक जिल्हे में त्रंबकेश्वर क्षेत्र में यह अंजनेरी स्थान है| यहापर बडेसे पाव के आकार का तालाब है| माना जाता है की स्वयं हनुमानजी के पाव का यह आकार है| इस तालाब को ‘Hanuma ji Feet Lake’ कहा जाता है| 

Hanuman Ji feet lake at Anjaneri

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