Durga Chalisa in Hindi | श्री दुर्गा चालीसा | नमो नमो दुर्गे सुख करनी

Durga Chalisa in Hindi: दुर्गा, देवी यह शक्ति और वीरता का रूप है| माँ दुर्गा यह हिन्दू पुराण कथाओ के अनुसार देवी का एक उग्र रूप है| माँ दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है| महिषासुर यह एक क्रूर राक्षस था जिसने देव लोक पर कब्ज़ा करके देवताओंको परेशान करना शुरू कर दिया था| सभी देवताओंने माँ दुर्गा का आवाहन करके उनसे महिषासुर दैत्य का वध करने को कहा| 

हजारो साल पहले महिषासुर नामक एक दैत्य था जिसका आधा शरीर भैसे का और आधा शरीर राक्षस का था| उसने कई सालो तक घोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया| ब्रह्मा से उसने देव या मानव, इनमेसे कोई भी उसका वध ना कर सके ऐसा वर मांग लिया| 

ब्रह्मदेव से वर मिलने के बाद महिषासुर ने देव लोकपर कब्ज़ा कर के देवो को देव लोक से भगाना शुरू कर दिया| डरे हुए देवोने माँ दुर्गा का आवाहन करके महिषासुर का वध करने को कहा| माँ दुर्गा ने दशहरे के दिन महिषासुर राक्षस का वध किया और विश्व का विनाश होने से बचा लिया| 

Durga chalisa में माँ दुर्गा के विविध रूपों का वर्णन करके उनकी स्तुती की गयी है| उनसे सारे विश्व को और मानव जाती को महिषासुर रुपी दानवो का विनाश करके सभी को सुखी रखने का आवाहन किया गया है|

durga chalisa in hindi

Durga Chalisa in Hindi | नमो नमो दुर्गे सुख करनी

नमो नमो दुर्गे सुख करनी | नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ||                                                            निरंकार है ज्योति तुम्हारी | तिहूँ लोक फैली उजियारी ||
शशि ललाट मुख महाविशाला | नेत्र लाल भृकुटि विकराला ||
रूप मातु को अधिक सुहावे | दरश करत जन अति सुख पावे ||1||

तुम संसार शक्ति लै कीना | पालन हेतु अन्न धन दीना ||
अन्नपूर्णा हुई जग पाला | तुम ही आदि सुन्दरी बाला ||
प्रलयकाल सब नाशन हारी | तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ||
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें | ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें  ||2||

रूप सरस्वती को तुम धारा | दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ||
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा | परगट भई फाड़कर खम्बा ||
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो | हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ||
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं | श्री नारायण अंग समाहीं ||3||

क्षीरसिन्धु में करत विलासा | दयासिन्धु दीजै मन आसा ||
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी | महिमा अमित न जात बखानी ||
मातंगी अरु धूमावति माता | भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ||
श्री भैरव तारा जग तारिणी | छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ||4||

केहरि वाहन सोह भवानी | लांगुर वीर चलत अगवानी ||
कर में खप्पर खड्ग विराजै | जाको देख काल डर भाजै ||
सोहै अस्त्र और त्रिशूला | जाते उठत शत्रु हिय शूला ||
नगरकोट में तुम्हीं विराजत | तिहुँलोक में डंका बाजत ||5||

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे | रक्तबीज शंखन संहारे ||
महिषासुर नृप अति अभिमानी | जेहि अघ भार मही अकुलानी ||
रूप कराल कालिका धारा | सेन सहित तुम तिहि संहारा ||
परी गाढ़ सन्तन र जब जब | भई सहाय मातु तुम तब तब ||6||

अमरपुरी अरु बासव लोका | तब महिमा सब रहें अशोका ||
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी | तुम्हें सदा पूजें नरनारी ||
प्रेम भक्ति से जो यश गावें | दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ||
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई | जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ||7||

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी | योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ||
शंकर आचारज तप कीनो | काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ||
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को | काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ||
शक्ति रूप का मरम न पायो | शक्ति गई तब मन पछितायो ||8||

शरणागत हुई कीर्ति बखानी | जय जय जय जगदम्ब भवानी ||
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा | दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ||
मोको मातु कष्ट अति घेरो | तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ||
आशा तृष्णा निपट सतावें | मोह मदादिक सब बिनशावें ||9||

शत्रु नाश कीजै महारानी | सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ||
करो कृपा हे मातु दयाला | ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ||
जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ | तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ||
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै | सब सुख भोग परमपद पावै ||10||

देवीदास शरण निज जानी | कहु कृपा जगदम्ब भवानी ||

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here