बॉलीवुड नगरी में सपनो का सिलसिला कभी रुकता नही है| पुराने सितारे जैसे ही ढलान की कगार पर होते हैं नए सितारे अपना तेज़ फ़ैलाने के लिए तैयार हो जाते है| यह ऐसी ही एक उगते सितारे की कहानी है जो अपने सपनो के पीछे कुछ इस तेजी से भागा की दूर दिखने वाले सपने भी करीब आगये| इस उगते सितारे का नाम है रणबीर सिंह जिसे बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री का अगला सुपरस्टार कहा जाता है| Ranveer Singh Life Story | Bollywood Next Superstar.

8 साल के उम्र में ही हीरो बनने का तय किया था

                   महाराष्ट्र के मुंबई में 6 जुलाई 1985 में सिंधी परिवार में जन्मे रणवीर सिंह का पूरा नाम रणवीर सिंह भवनानी हैं| उनके माताजी का नाम अंजू और पिताजी का पूरा नाम जगजीत सिंह भवनानी है| जगजीत सिंह के दादाजी सुन्दर सिंह भवनानी इंडिया और पाकिस्तान के Partition के दौरान कराची सिंध से मुंबई आ गए थे| सिंध अभी पाकिस्तान में है| रणवीर सिंह की बड़ी बेहेन का नाम रितिका भवनानी हैं|

                  मुंबई के बांद्रा में रहने वाले रणवीर को बचपन से ही फिल्मो का बड़ा शौक था| जब उनके उम्र के 8-9 साल के बच्चे बाहर खेलने जाते थे तब वो घर में बैठ के फिल्मे देखा करते थे| संगीत सुना करते थे या फिल्मी magzine पढ़ा करते थे| रणवीर बचपन से ही बड़े फ़िल्मी बच्चे थे और उनका सपना हिंदी फिल्म का हीरो, शेनशाह, अजूबा, मिस्टर इंडिया बनना था| हिंदी फिल्म में हीरो बनने का सपना उनकी दादीजी ने उन्हें दीखाया था| उनकी दादीजी अमिताभ बच्चन की बड़ी प्रशंसक थी| रणवीर के साथ अमिताभजी की फिल्मे देखते वक्त वो उनसे कहती थे बेटा तुम्हे भी बड़ा हो के एक दिन ऐसेही हिंदी फिल्म का हीरो बनना है|

19 साल की उम्र में अमेरिका गए एडवरटाइजिंगकी पढाई करने

                 सैंट Andrew school में रणबीर ने पढाई के साथ साथ एक्टिंग, डांसिंग और sports में भी रूचि दिखाई| School की पढाई ख़त्म करने के बाद H. R. कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स और इकोनॉमिक्स में एडमिशन ले लिया| इन्ही दिनों में उनको प्रोडक्ट के लिए की जाने वाली कॉपीराईटिंग में रूचि उत्पन्न हो गयी| पिताजी के पहचान वाले एडवरटाइजिंग एजेंसी में उन्होंने copywriting की इंटर्नशिप कर ली| उनके माताजी और पिताजी की बहुत इच्छा थी की रणबीर पढने अमेरिका जाये| जिससे उनको दुनिया के बारे में समज हो| और 19 साल की उम्र में ही रणवीर एडवरटाइजिंग की पढाई करने के लिए अमेरिका चले गए| एडवरटाइजिंग की पढाई के साथ साथ वहापर उन्होंने एक्टिंग क्लास में भी एडमिशन ले लिया था| अमेरिका में रणवीर 4 साल रहे|

बड़ा पेट, आखोके नीचे काले धब्बे में कैसे हीरो बनुगा

               अमेरिका के इंडिआना यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ़ आर्ट्स की डिग्री लेकर भारत लौट आये रणवीर| इसी वक्त हिंदी फिल्मोमे हीरो बनने का उनका सपना फिरसे जाग उठा| हिंदी फिल्मो में बिना पहचान के काम मिलना कितना मुश्किल है यह रणवीर जानते थे| वह अपने मित्र शाद अली के यहा असिस्टेंट डायरेक्टर बन गए| शाद अली ने अमिताभ बच्चन को लेकर ‘झूम बराबर’ यह फिल्म बनाई थी| रणवीर का ख्याल था की असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के बाद उनकी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान हो जायेगी और उनके हीरो बनने के सपने में मदद होगी| डेढ साल तक असिस्टेंट डायरेक्टर का कडा मेहनत वाला काम करने के बाद उन्होंने अपने आपको एक अलग ही रूप में पाया| आखोके नीचे काले दाग और बढा हुआ पेट| रणवीर समझ गए ऐसे रूप में तो वो कभी भी हीरो नहीं बन सकते| उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर का जॉब छोड़ने का फैसला कर लिया|

पृथ्वी थिएटर में झाडू मारते थे रणवीर

                 काम छोड़ने के बाद रणवीर ने अपना पूरा ध्यान एक्टिंग के तरफ दे दीया| असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के पहले वो टीवी सीरियल और नाटको में काम कीया करते थे| काम के वजहसे उन्होंने दो साल एक्टिंग छोड़ ही दी थी इसलिए उन्होंने थिएटर के जो 6 कोर्स थे वो कर डाले| दो-तीन नाटको में भी काम किया| वेस्टर्न एक्टिंग कोर्स करने के बाद देसी एक्टिंग कोर्स कर डाला| रणवीर अब सोच रहे थे कोई थिएटर की एक्टिंग हो जाये| उन्होंने पृथ्वी थिएटर की नाटको में काम करने का फैसला किया| पर वहापर किसीसे पहचान नही थी| पृथ्वी थिएटर में जहा पर नाटको की Rehersal होती है वहापर रणवीर अपने आप सुबह 8 बजे जाके कमरे में झाडू मारके एक्टर आने से पहले साफ़ करते थे| एक्टर लोगोको चाय, समोसे लाके देना, उनकी मदद करना ऐसे काम वो किया करते थे| रात को सब एक्टर चले जाने के बाद रणवीर कमरे में झाडू लगाकर लाइट, fan बंद कर देते थे| रणवीर पृथ्वी थिएटर में नोकर जैसा ही काम किया करते थे| पृथ्वी थिएटर के 2-4 नाटको में उन्होंने छोटे रोले भी कर लिए थे| पृथ्वी थिएटर में उन्होंने 1 साल 8 महीने तक कम किया|

बेटे का सपना पूरा करने के लिए बापने घर और गाडी बेच दी

                 नाटको और सीरियल में काम करते करते रणवीर फिल्मोके लिए ऑडिशन भी दे रहे थे| ऐसे में उनको चार मिड budget फिल्म में हीरो का रोल मिल गया था| पर रणवीर का उन फिल्मोमें काम करने को मन नही किया| रणवीर ने इन फिल्मो में काम करनेसे मना कर दीया| रणवीर को पता था एक नये लड़के के लिए जिसका कोई फ़िल्मी background नही उसके लिये ऐसे फिल्मो का ऑफर ठुकरा देना समजदारी की बात नही है| हो सकता है इससे फ़िल्मी करियर ही ख़राब हो जाये| उनके पिताजीने रणवीर को पढाई के लिए अमेरिका भेजने से लेकर उनके हीरो बनने के सपनोको साकार करने के लिए अपना रहता घर और कार तक बेच दी थी| पर रणवीर ने मन बना लिया और अच्छे फिल्म offer का इंतज़ार करने का मन बना लिया|

‘बैंड बाजा बारात’

                   एक शाम को रणवीर की दोस्त शानू ने उनको फ़ोन करके बताया की आदित्य चोप्रा (Yrf head) नयी फिल्म बनाने जा रहे है| उनको नये लडके की तलाश है| रणवीर ने पहला ऑडिशन पास कर लिया| पर बाकी के ऑडिशन में वो ख़राब काम करते जा रहे थे| यह देख खुद आदित्य चोप्रा रणवीर से मिलने आ गए और उनका होसला बढाया| रणवीर ने फाइनल ऑडिशन पास कर लिया| वो फिल्म के हीरो के रूप में चुन लिए गए| इस फिल्म का नाम था ‘बैंड बजा बारात’| यह फिल्म सुपरहिट हो गयी और रणवीर बॉलीवुड के हीरो बन गए| इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मो में काम किया| संजय भनसाली की सुपरहिट फिल्म ‘बाजीराव’ में किये अप्रतीम अभिनय के बाद उनको बॉलीवुड का अगला सुपरस्टार माना जा रहा है|

                   इस तरह से आठ साल के उम्र में हिंदी फिल्मो का हीरो बनने का सपना देखने वाले लडके ने अपनी अपार मेहनत और होसले से सपनोको हकीकत में बदल दीया|

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